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फ्रेशर्स को कम वेतन देने के लिए गुटबंदी कर रहीं हैं आईटी कंपनियांः पई

The University Network 2017/02/23 00:48

आईटी उद्योग से नए छात्रों के लिए अच्छर खबर नहीं है। इस सेक्टर के पुराने दिग्गज और इन्फोसिस टेक्नोलॉजी के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी टीवी मोहनदास पई का आरोप है कि देश की बड़ी आईटी कंपनियों ने नई भर्ती के लिए ‘गिरोहबाजी’ कर ली है। ये लोग कर्मचारियों का वेतन कम रखने के लिए परस्पर सहमति बना रहे हैं। दरअसल, कंपनियां शुरूआती स्तर के साॅफ्टवेयर इंजीनियरों की बहुतायत में उपलब्धता का गलत फायदा उठा रही हैं। पई ने पीटीआई से कहा, यह भारतीय आईटी उद्योग के साथ दिक्कत है। भारतीय आईटी उद्योग अपने नए कर्मचारियों को ढंग का वेतन नहीं दे रहा है।

टीवी मोहनदास पई कहते हैं, बड़ी कंपनियां नए भर्ती लोगों का वेतन नहीं बढ़ाने के लिए एकजुट हो गई हैं और वे आपस में इस विषय में बातचीत भी करती रहती हैं। रपटों के अनुसार दो दशक पहले इस उद्योग में फ्रेशर को 2.25 लाख रुपए सालाना की शुरुआती पेशकश होती थी। वह बढ़कर अब केवल 3.5 लाख रुपए है। इससे पता चलता है कि मुद्रा स्फीति के लिहाज से वास्तविक वेतन बहुत अधिक घटा है। देश की प्रमुख आईटी कंपनी इन्फोसिस के मुख्य वित्त अधिकारी रहे पई के अनुसार यह बड़े दुख की बात है कि बड़ी कंपनियां फ्रेशरों का वेतन नहीं बढ़ाने के लिए आपस में बातचीत कर रही हैं। पई के अनुसार ‘यह अच्छा संकेत नहीं है।




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