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चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए खत्म होंगी होम्योपैथी और आयुर्वेद मेडिसन काउंसिल

The University Network 2017/02/23 00:00

नीति आयोग देश के मेडिकल सिस्टम को सुधारने के लिए प्रयास कर रहा है। इसके तहत सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपथी (सीसीएच) और सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीईएम) को बंद किया जा सकता है। दरअसल, आयोग दो नए बिलों पर काम कर रहा है, जिनमें स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत आने वाली इन दोनों काउंसिलों को बदलने के सुझाव हैं। ये काउंसिल देश में होम्योपैथी और आयुर्वेद सहित चिकित्सा की भारतीय पद्धतियों में उच्च शिक्षा पर नियंत्रण करती हैं।

ये काउंसिल दशकों पुरानी हैं और इस दौरान इनके कामकाज के तरीकों में सुधार या बदलाव नहीं किए गए हैं। अब इनके स्थान पर एक नया संगठन बनाने की तैयारी है। इसके लिए एक ड्राफ्ट बिल तैयार है। लेकिन इस बारे में अंतिम फैसला नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता वाला पैनल लेगा। इस पैनल का गठन स्वास्थ्य मंत्रालय के आयुष विभाग में सुधार के लिए किया गया है। पैनल ने पिछले वर्ष मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की ओर से मेडिकल एजुकेशन के खराब नियमन पर विचार किया था। इसके स्थान पर नेशनल मेडिकल कमीशन बनाने का सुझाव दिया था। इस प्रस्ताव को अनुमति के लिए कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। इसके बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की तरह इन दोनों काउंसिल की उपयोगिता भी कम हो गई है। इसके साथ ही इनके कड़े नियम कायदों के कारण जटिलता बढ़ती है। होम्योपैथी और आयुर्वेद में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना मुश्किल होता है। उन्होंने बताया कि नीति आयोग ने दोनों बिलों पर सभी पक्षों से राय ली है। अब जल्दी इन्हें सार्वजनिक राय के लिए पेश किया जाएगा। इसके बाद इन्हें कैबिनेट के पास भेजा जाना है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत आने वाली सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपैथी का गठन 1973 में किया गया था। इसका मकसद देश में होम्योपैथी एजुकेशन की निगरानी करना था। होम्योपैथी में डिग्री देने वाले संस्थानों को इसके लिए पहले सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपैथी से अनुमति लेनी होती है, जो पाठ्यक्रम का सुझाव देती है। होम्योपैथी की प्रैक्टिस करने वालों का पंजीकरण करती है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के आयुष विभाग के तहत आने वाली सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन की शुरुआत 1971 में हुई थी। यह देश में आयुर्वेद, सिद्धा और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों में हायर एजुकेशन पर नियंत्रण रखती है।




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