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सिर्फ 10 फीसदी रोशनी के दम पर आईआईएम तक पहुंची, हैरान कर देगी परिधि वर्मा की कहानी

The University Network 2017/02/22 00:30

आईआईएम लखनऊ में पढ़ाई करना बड़े फक्र की बात है। लेकिन कुछ मेधा ऐसी होती हैं जो अपने जज्बे के सामने सबकुछ छोटा कर देती हैं। जयपुर की रहने वाली परिधि वर्मा भी ऐसी एक मेधावी लड़की हैं। परिधि की आंखें सामान्य के मुकाबले केवल 10 प्रतिशत देख पाती हैं। मतलब, उनकी 90 प्रतिशत दृश्य क्षमता समाप्त हो चुकी है। वह आईआईएम लखनऊ में फ्रेशर हैं और अपने बैच में सबसे युवा हैं। आजकल सोशल मीडिया से लेकर अखबारों और वेबसाइटों पर छाई हुई हैं।

परिधि ने आईआईएम लखनऊ के मैनेजमेंट पीजी प्रोग्राम में दाखिला लिया है। वह संस्थान में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि वह अपनी जिंदगी में पहली बार अपने माता-पिता से दूर रह रही हैं। पहले मुझसे कुछ भी नहीं संभल रहा था क्योंकि तैयारियों में काफी ज्यादा पढ़ाई करनी पड़ती थी। घर पर पापा मेरे लिए पढ़ते थे। ऐसा वक्त भी आया था जब मैंने पीछे हटने के बारे में सोचा था लेकिन तब मेरे कई दोस्त आगे आए और सहायता की।


परिधि का बचपन दिल्ली में बीता है
परिधि का जन्म मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में हुआ था। उन्होंने अपनी जिंदगी के शुरुआती साल दिल्ली में बिताए। उसके बाद रक्षा मंत्रालय में कार्यरत अपने पापा सतेंद्र और मम्मी कृष्णा प्रभा वर्मा का ट्रांसफर होने पर परिधि देहरादून चली गईं। उस समय परिधि कक्षा 6 में पढ़ रही थीं। उन्होंने 11वीं कक्षा केंद्रीय विद्यालय जयपुर में की और इसी शहर से अपनी स्नातक कह पढ़ाई पूरी की है।
कपड़ों को छूकर रंग बता देती हैं परिधि
लखनऊ आने के बाद उनकी चुनौती बढ़ गईं जब पहले ही महीने में उन्हें लिगामेंट टीयर से जूझना पड़ा। परिधि ने बताया कि कमजोर नजर के कारण वह फिसल गईं थीं। रात को उन्हें कैंपस में टहलने में दिक्कत होती है। कहती हैं, हॉस्टल में मैं अपने शार्प सेंसेज की वजह से हर चीज खुद मैनेज कर लेती हूं। सिर्फ छूकर मैं किसी भी ड्रेस का रंग बता सकती हूं।


रेडियो जाॅकी बनने की इच्छा
परिधि जयपुर से बीबीए ग्रेजुएट और मास कम्यूनिकेशन और विडियो प्रोडक्शन में डिप्लोमा हासिल कर चुकी हैं। वह पहले सिविल सर्विसेज में जाना चाहती थीं। उनके एक दोस्त ने उन्हें आईआईएम की तैयारी करने की सलाह दी। परिधि कहती हैं कि मैंने इस सलाह को हल्के में लिया और सिर्फ ढाई महीने एग्जाम की तैयारी की। परिणाम मेरे लिए चैंकाने वाले थे। परिधि रेडियो जॉकिंग को लेकर काफी उत्साहित हैं और एमबीए के बाद यही करना चाहती हैं। वह कहती हैं कि रेडियो जॉकिंग यानी बातें करना जो कि मैं पूरे दिन कर सकती हूं।




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