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आईआईटी, आईआईएम और यूनिवर्सिटियों में खाली पड़े पदों पर सासंदों ने जताई नाराजगी

The University Network/New Delhi 2017/02/19 16:18

शिक्षा से जुड़े मामलों की संसदीय समीति ने आईआईटी, आईआईएम और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी पर नाराजगी जताई है। सरकार से कहा है कि वह रिक्तियों को भरने के लिए कदम उठाये और शिक्षण के पेशे को और अधिक आकर्षक बनाएं। जिससे युवक शिक्षा क्षेत्र के प्रति आकृषित हों।

भाजपा सांसद सत्यनारायण जटिया की अध्यक्षता में मानव संसाधन विकास पर गठित संसद की स्थायी समिति ने एक रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में कहा है कि उच्च शिक्षा विभाग रिक्तियों को भरें। रिक्तियां भरने की प्रक्रिया को तेज किया जाए। समिति ने इस पर गुस्सा जताया और कहा, प्रतिष्ठित केन्द्रीय विश्वविद्यालयों से लेकर हाल में स्थापित विश्वविद्यालयों, राज्य या निजी विश्वविद्यालयों, आईआईटी और आईआईएम में तमाम पद रिक्त पड़े हैं।

31 सदस्यीय समीति ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पर्याप्त संख्या में और योग्य शिक्षक होना जरूरी है। निकट भविष्य में कोई सुधार नहीं दिखने से स्थिति और ज्यादा गंभीर बनी हुई है। समिति ने कहा, ‘‘दो संभावनाएं हो सकती हैं या तो हमारे युवा छात्र शिक्षक के पेशे में नहीं आना चाहते हैं या भर्ती प्रक्रिया लंबित है और इसमें कई अनुपयुक्त औपचारिकताएं शामिल है।’’

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत आने वाले उच्च शिक्षा विभाग का जिक्र करते हुए पैनल ने कहा कि यह पूरे देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र क लिए नोडल प्राधिकरण है। उसे मौजूदा रिक्तियों की भर्ती प्रक्रिया तेज करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। पैनल ने यह भी सिफारिश की कि शिक्षण के पेश को अधिक आकषर्क बनाने के लिए फैकल्टी को प्रोत्साहित करना चाहिए। उनके कामकाज में दखल कम हों और काम शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए।

एचआरडी मंत्रालय ने गत वर्ष दिसंबर में संसद में बताया था कि विभिन्न केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों के 1,310 पद खाली पड़े हैं। हाल ही में संपन्न संसद सत्र में एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों के ज्यादातर रिक्त पदों को इस वर्ष भरा जाएगा। गौरतलब है कि यूजीसी पोषित विभिन्न केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के कुल 17,006 पदों में से 6,080 पद एक अक्तूबर 2016 से खाली पड़े हैं। पैनल ने अपनी रिपोर्ट में छात्रों में रोजगार के कौशल की कमी पर भी चिंता जताई है। सरकार से इस पर कदम उठाने के लिए कहा है।




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